जनवादी लेखक संघ की दिल्ली इकाई आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राचार्य द्वारा कथित रूप से किये गए यौन उत्पीड़न और उसकी कोई सुनवाई न होने कि स्थिति में उत्पीड़िता पवित्रा भारद्वाज द्वारा आत्मदाह की घटना पर अपना दुःख और आक्रोश व्यक्त करती है . प्राचार्य जी. के. अरोड़ा के खिलाफ कॉलेज के भूगोल विभाग की लैब अटेंडेंट सुश्री पवित्रा भारद्वाज ने चार साल पहले यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की थी जिस पर सुनवाई के दौरान इस तरह के मामलों से सम्बंधित तमाम नियमों का उल्लंघन किया गया और प्राचार्या को क्लीन चिट दे दी गयी . उन उल्लंघनों का हवाला देते हुए सुश्री पवित्रा ने अनगिनत पत्र विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली सरकार को लिखे किन्तु उनका कोई असर न हुआ . प्राचार्य ने इस बीच पवित्रा और उनके पक्ष के गवाहों के साथ दुर्व्यवहार जारी रखा और स्पष्ट रूप से बदले की भावना का परिचय देते हुए बिना समुचित विधियों का पालन किये उत्पीडिता को नौकरी से बर्खास्त कर दिया . अंततः उत्पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाते हुए दिल्ली सचिवालय के सामने आत्मदाह कर लिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी .
जनवादी लेखक संघ इस घटनाक्रम पर अपना क्षोभ व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और प्राचार्य की अविलम्ब गिरफ्तारी तथा पद से मुअत्तली की मांग करता है . विश्वविद्यालय प्रशासन सबूतों के अभाव का हवाला देकर जिस तरह से प्राचार्य को बचाने की कोशिशें कर रहा है, वह निंदनीय है . साथ ही, दिल्ली पुलिस पीड़िता के मौत के समय के बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) को कोई महत्व न देकर जिस तरह इस मामले में निष्क्रियता दिखा रही है, हम उसकी भर्त्सना करते हैं .
(बली सिंह)
सचिव, जनवादी लेखक संघ, दिल्ली इकाई
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